ऑस्टियोआर्थराइटिस क्या है नागपाल रोबोटिक्स बठिंडा

ऑस्टियोआर्थराइटिस क्या है – कारण, लक्षण और इलाज (हिंदी में)

मई 2026 डॉ. परमप्रीत सिंह नागपाल ऑस्टियोआर्थराइटिस जानकारी

ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis) भारत में जोड़ों की सबसे आम बीमारी है। पंजाब में भी यह बीमारी लाखों लोगों को प्रभावित करती है, खासकर 50 साल से अधिक उम्र के लोगों को। इस लेख में हम हिंदी में बताएंगे कि ऑस्टियोआर्थराइटिस क्या होता है, इसके क्या कारण और लक्षण हैं, और नागपाल रोबोटिक्स, बठिंडा में डॉ. परमप्रीत सिंह नागपाल इसका सर्वोत्तम इलाज कैसे करते हैं।

ऑस्टियोआर्थराइटिस क्या होता है?

हमारे घुटने के जोड़ में हड्डियों के सिरों पर एक चिकनी, लचीली परत होती है जिसे कार्टिलेज (उपास्थि) कहते हैं। यह कार्टिलेज घुटने में आराम से हिलने-डुलने में मदद करती है और हड्डियों के बीच कुशन का काम करती है।

ऑस्टियोआर्थराइटिस में यह कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसने लगती है। जब कार्टिलेज पूरी तरह खत्म हो जाती है, तो हड्डियां आपस में सीधे रगड़ने लगती हैं। इससे:

ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण

ऑस्टियोआर्थराइटिस की ग्रेडिंग (Stages)

ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षण

ऑस्टियोआर्थराइटिस का इलाज

बिना ऑपरेशन के इलाज (ग्रेड 1-2)

रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी (ग्रेड 3-4)

जब बीमारी ग्रेड 3 या 4 तक पहुंच जाए और दवाइयों से राहत न मिले, तो रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी ही सबसे कारगर इलाज है। नागपाल रोबोटिक्स, बठिंडा में डॉ. परमप्रीत सिंह नागपाल पंजाब के पहले CUVIS रोबोट का उपयोग करके यह सर्जरी करते हैं। 1,500+ सफल ऑपरेशन और 98% मरीज संतुष्टि दर इस सर्जरी की सफलता की गवाही देते हैं।

ऑस्टियोआर्थराइटिस का इलाज कराएं

डॉ. परमप्रीत सिंह नागपाल – नागपाल रोबोटिक्स, मॉल रोड, बठिंडा

कॉल करें: +91 98551-63355 अपॉइंटमेंट लें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ऑस्टियोआर्थराइटिस क्या होता है?

यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें घुटने की कार्टिलेज धीरे-धीरे घिस जाती है और हड्डियां आपस में रगड़ने लगती हैं — जिससे दर्द, सूजन और अकड़न होती है।

ऑस्टियोआर्थराइटिस का इलाज क्या है?

शुरुआत में दवाइयां और फिजियोथेरेपी। गंभीर अवस्था में नागपाल रोबोटिक्स, बठिंडा में रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी सर्वोत्तम इलाज है।

ऑस्टियोआर्थराइटिस किसे होता है?

50 साल से अधिक उम्र के लोगों को, अधिक वजन वालों को, और भारी शारीरिक काम करने वालों को यह बीमारी होने का खतरा अधिक होता है।